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1. हमने यू ही नही अपनी पहचान बनाई है ,
ना जाने कितने बुजुर्गो ने अपनी जान गवाई है.
आज कहते है मदरसो से ऑतकवादी निकलते है ,
मदरसे से निकलकर अब्दुल कलाम आजाद ने भारत की शान बनाई है !
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2. हमे न डराओ चार दिन की हुकूमत से सोच लो तुम ,
मेरा निगहबान खुदा है दिलो दिमाग से सोच लो तुम .
गाय के नाम पर जो बहाया है लहू सडको पर,
कतरा -कतरा वसूल लेगे सोच लो तुम !
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3. नबी की शान बाकी है ,
अभी इस्लाम जिन्दा है .
नफरतो को मिटाने के लिए ,
हमारा प्यार बाकी है ,
अभी इमान जिन्दा है !
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4. हरगिज बुझा न पाओगे मेरा चराग तुम ,
जब बुजुर्गो की दुआ मेरे साथ है .
मुझको डरा रहे हो हवा से ऐ बेवकूफ ,
तुझको ख़बर नही है कि खुदा मेरे साथ है !
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5. नशेमन याद आता है वो मन्ज़र याद आता है !
लुट गया मेरे ही वतन मे मेरा घर याद आता है !!
करोड़ों होकर भी हम यहाँ पर घुटने टेक बैठे हैं !
मुझे वो तीन सौ तेराह का लश्कर याद आता है !!